बे fikra इश्तिहार

Saturday, December 6, 2025

आधुनिक शिक्षा और वैश्विक निरपेक्षता

पिछले कुछ सालों में आधुनिक शिक्षा को लेकर जिस प्रकार नकारात्मक देखने को मिल रही है उससे तो यही लग रहा है विश्व अब अध्यात्म की राह छोड़ कर ढोंग की ओर अग्रसर हो रहा है जिसमें अब छोटे बच्चे पूर्ण रूप से ज्ञान देते नजर आ जाएंगे जिन्हें विद्यालयों में अपनी प्रारंभिक शिक्षा लानी चाहिए वह आध्यात्मिक ज्ञान देकर करोड़ों का टर्न ओवर भी कमा रहे है बात सिर्फ यही तक होती तो यह उनका 


निजी मामला कहा जा सकता है परन्तु जिस तरह वह वर्तमान में वो वैश्विक शिक्षा को दबे मुंह गलत बता रहे हैं, यहां भविष्य के लिए लिए किसी खतरे की घंटी से कम नहीं है। हमारा आध्यात्म विश्व में बेहद शानदार और खुला,  संदेश देता है जिसमें जहां रामायण की मर्यादा शमिल है वहीं आवश्यकता पड़ने पर महाभारत  में युद्ध की सीख भी शमिल है।  ये सभी हमें समयानुसार जीवन जीने की ही प्रेरणा देता है परन्तु आज लोग ज्ञान के नाम पर सिर्फ पीछे खींचने पर लग गए है।  स्वागत है आपका uveeright पर जहां आज हम बेहद गंभीर और वर्तमान में युवाओं को शिक्षा से कम होते रुझान का मंथन करेंगे जिसका मुख्य कारण सोशल मीडिया पर पाखंड का बढ़ता प्रचार प्रसार भी है आइए इसे समझते है - 

जातीय पाखंड 
  जातीय महानता यदि वर्तमान परिस्थितियों को देख कर लगाया जाए तो यह कुछ कुछ प्रथम श्रेणी - चतुर्थ श्रेणी के बीच व्यक्तिगत मानसिकता के जैसी ही प्रतीत होती है। कहते है, जिसमें ज्ञान निवास करता है वह स्वतः ही अपना स्थान प्राप्त कर लेता है और अज्ञानता हमें कभी बढ़ने नहीं देती। बस यही कारण रहा की हो सकता है की जो आज श्रेणियों में विभाजित है कल वर्णों में रहे हो सकते हैं। अब इनमें कुछ लोगों को आंतरिक स्वार्थ रहा हो सकता है की यह फासला हमेशा यूंही बना रहे। यह मानसिकता वर्तमान समय में कुछ बुद्धिजीवियों के बयानों से समझा जा सकता है जो निचले तबके को गुरुकुल शिक्षा के लायक नहीं समझाते और वही अंग्रेजी शिक्षा को भी खत्म करना चाहते है।  यदि गुरुकुल शिक्षा को महत्ता देनी ही है तो शैक्षिक पर्यावरण में भेद पाठ्यक्रम में भेद , क्यों करना हैं। यदि मन मानी करना ही हैं तो आधुनिक शिक्षा का विकल्प हमेशा खुला होना चाहिए। 


  
सर्वशिक्षा क्यों आवश्यक हैं?
   व्यापार से केवल धन और शिक्षा से  व्यक्तिगत नैतिकता , धन और  उसका प्रबंध करने की क्षमता का विकास होता है। हालांकि यह मेरे व्यक्तिगत विचार है हर कोई इससे इत्तेफाक नहीं रख सकता क्योंकि आज शिक्षा इतनी जटिल हो गई है जहां शिक्षा केवल धन के अनुसार ही रह जाता है जहां बच्चे के गुण केवल कागज़ों ज़्यादा नजर आ रहे हैं। आज छात्र चिंता मुक्त होकर ज्ञान नहीं प्राप्त कर रहा है वह बस माता - पिता के दबाव में मेरा बच्चा सबसे अच्छा की रेस में दौड़ता नजर आ जायेगा। इसमें बच्चे का क्या विकास हुआ नहीं पता।  रीजनिंग  मानसिक कुशलता का पैमाना बन ही चुका था वहीं अब उसमें धार्मिक हस्तक्षेप का भी कही न कहीं तड़का लग चुका है या यूं कहे की बस चार कदमों की दूरी पर ही है। धर्म कभी बुरा नहीं हो सकता लेकिन उसका प्रचार प्रसार करने वाला अपने व्यक्तिगत हित जरूर साध सकता है।

  मनु स्मृति 

 हम आज फिर से मनुस्मृति के प्रसंशको को जिस प्रकार अपनी मानसिक विचारों का प्रदर्शन करते हुए सुन सकते है । उससे तो यही लगता है की पहले आधुनिक शिक्षा की बुराई फिर जातीय गुलामी............ फिर विदेशियों का हस्तक्षेप पर फिर ये जातीय तौर पर गुलाम बनाने वाले उनके गुलाम । देखा जाए तो फिर विदेशी उच्च वर्ण होना चाहिए। क्योंकि दुनिया के असल आविष्कार और उत्थान तो विदेशों में ही हुआ है । आज दुनियां में लोग हमारे ग्रंथों का उपयोग करके सीख लेते हैं फिर  वह पिछड़ने की जगह उनका उत्थान ही हुआ । 

    इन सब में सबसे ज़्यादा दुर्दशा तो महिलाओं की ही हुई है है जहां सामान्य महिलाएं घर के अंदर घूंघट में भोजन करने तक के लिए आज़ाद नहीं थी विचार रखना तो दूर की ही बात है।    वही पिछड़ी महिलाएं आत्म स्वतंत्रता का भी अधिकार नहीं रखती थीं।  जब आज स्वतंत्रता मिली है तो महिलाएं स्वयं ही घूंघट, शिक्षा में कुछ नहीं रखा , आरक्षण के खिलाफ जैसे विचारों का प्रचार करती नजर आ रही है । ये आरक्षण खत्म हुआ तो महिलाओं का आरक्षण खत्म होने में कितनी ही देर लगेगी। 

आरक्षण की समाप्ति 

  मेरा व्यक्तिगत मानना है कि सबको एक सामान्य शिक्षा और खुले अवसर आरक्षण शब्द को स्वतः ही समाप्त कर देगी और यह प्रतियोगिता जीवित रहने से ही संभव है  न की धांधली करने के लिए अच्छे परिवार में जन्म लेने का अधिकार मानना, जिसे अच्छे भाग्य से  ईश्वरीय कृपा बताना  खैर यह पाखंड का सबसे बड़ा रूप है। जो आज चरम पर देखा जा रहा है।

Wednesday, August 6, 2025

सरकारी नीति और शिक्षा व्यवस्था

 भारत वर्तमान में  70 सालों में जिस तरह आगे बढ़ रहा था धीरे धीरे ही सही , लगता है अब उतना ही पीछे जा सकता है। इसका अनुमान हम उसकी वर्तमान नीतियों को देख कर लगा सकते है खासकर शिक्षा व्यवस्था से सम्बंधित नीतियों को समझे तो पिछले कुछ वर्षों को  देखें तो इसका अंदाज़ा लगाना कुछ खास मुश्किल नहीं है।

स्वागत है आपका uveeright पर  हमारे देश की वर्तमान सरकार   जिसतरह से अपनी शैक्षिक नीतियों का प्रचार कर रही थी फिर चाहे गरीब बच्चों को मुफ़्त में बड़े विद्यालयों में दाखिला करना हो, नई शिक्षा नीति 2020 हो या शिक्षकों की भर्ती के लिए  लिया गया फैसले हो  जो कि 2018 से सब तक नहीं हो पाई है । या अन्य और भी शिक्षा सम्बंधित फैसले हो ये सभी नीतियां देखा जाए तो अपने प्रचार के समय बेहद आकर्षक लगती है लेकिन जब इन्हें सही से समझ जाए तो किसी धोखे से कम नहीं होती है यदि इनको गहनता से समझा जाए तो ये ब्लॉग काफ़ी लंबा हो जाएगा। इसको संक्षेप में समझे तो आज के हालत कुछ भी हो मगर सबकुछ सरकार के हिसाब से ही होता नजर आ रहा है । जहां जनता को लगता है  कि धरना प्रदर्शन करके सरकार उनकी सुनेगी वही सरकार ये जानती है कुछ दिन शोर मचेगा और फिर सब शांत हो जाएगा या कैसे शांत करवाना है । वर्तमान में अध्यापक खासकर ऑनलाइन अध्यापक  का जो धरना है उनके  शांत करवाने के लिए तो कोई नई डिजिटल नीति , सीबीआई जांच, इनकम टैक्स छापा या कोई और व्यवस्था। जैसे  सरकार जानती है कि चुप कैसे करना है। और रही बात इतने सारे प्राथमिक विद्यालयों को बंद करने की  जिसकी योजना सरकार पहले से बना ही रही थी बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में दाखिला करवा कर जिसके अनुसार अब गरीब का बच्चा तो प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहा है अब  सरकारी विद्यालय की क्या जरूरत। और नई शिक्षक नीति की बात रही तो कागजों पर इंटर्नशिप, 75% नंबर को आगे मिलने वाली सुविधा जिसमें मूल्यांकन में कितनी पारदर्शिता है ये सभी कही न कही समझते है अब इसे दबाव कहा जाए या विद्यालयों की नीति , इन सब  से तो बच्चे पढ़ाई पर कम खुराफात पर ज़्यादा ध्यान देंगे जो ध्यान स्वयं को बेहतर बनाने में लगाना चाहिए था वो अब 75% कैसे बनाएं इसपर ज़्यादा है एक छात्र को ये साबित करने के लिए कि वह कुछ सीख रहा है उसके लिए 50% ही काफ़ी है।

सामान्यतः वर्तमान की सभी रेखांकित मुद्दों को देखा जाए तो आगे क्या होगा देश किस दिशा में जा रहा है ये समझना कोई मुश्किल कम नहीं है और इन समस्याओं से उभरने का एक ही रास्ता है वो है शिक्षा और सही समय पर व्यवस्थित रूप से अपनी बात रखना फिर जब जरूरत पड़े तो अपने हक के लिए ज़िद्दी भी बनो ।

                धन्यवाद !


Wednesday, July 30, 2025

Korean chilli garlic potato ball / कोरियन चिली गार्लिक पोटेटो बॉल रेसिपी in hindi

जैसे जैसे समय आगे बढ रहा है लोग अब केवल लोकल व्यंजन तक सीमित नहीं रहना चाहते कुछ न कुछ नया सीखना और बनाना चाहते हैं अब इस ही कड़ी में आगे बढ़ते हुए हम आपके लिए वर्तमान में बेहद पसंद की जाने वाली रेसिपी लेकर आए है जोकि कम समय में तो बनकर तैयार होती ही है वहीं ज़्यादा सामग्री की भी आवश्यकता नहीं पड़ती। 

स्वागत है आपका uveeright पर आइए सीखते है कोरियन चिली गार्लिक पोटेटो बॉल बनाने की रेसिपी जिसके लिए आपको  चाहिए 


आवश्यक सामग्री 

                                                 

                                 


                                                       आलू

                                               मैदा/ कॉर्न फ्लोर 

                                                   सोया सॉस      

                                                 चिली सॉस 

                                                   लहसुन

                                                   सफेद तिल 

                                         स्प्रिंग अनियन / सागा प्याज़ 

                                                ऑलिव ऑयल 

                                                   नमक

                                                    पानी



बनाने की विधि 

                    सबसे पहले आलू को उबल ले अब ठंडा होने के लिए 1- 2 मिनट तक पानी में रख दे ।अब इसे  पानी से निकाल कर छील कर मैश करले इसमें मैदा या कॉर्न फ्लोर हल्का नमक और आवश्यकतानुसार  तेल डाल कर गोल आकृति में बना ले और ढक्कन की मदद से दिखाए गए चित्रानुसार आकर दे ।  इन बॉल को पानी में उबाल ले जब तक यह पानी की ऊपरी सतह पर ना जाए । अब इसे एक बर्तन में निकाल ले, इसमें सोया सॉस, चिली सॉस ,बारीक कटी हुई स्प्रिंग अनियन यानी प्याज़ के पत्ते डाल कर मिला ले  अब इसमें स्वादानुसार नमक डाले।

एक अलग बर्तन में तेल गर्म करें उसमें लहसून को सुनहरा होने तक तले। इस तड़के को पोटेटो बॉल के मिक्सचर में डाल कर मिलाए और सफेद तिल ऊपर से डाल ले । अब ये खाने के लिए तैयार है। 

           धन्यवाद।